Breaking : भाजपा के सभी 16 मंत्रियों ने सीएम को सौंपा इस्तीफा, सामन : Breaking : भाजपा के सभी 16 मंत्रियों ने सीएम को सौंपा इस्तीफा, सामने आई ये बड़ी वजह…
Thu, Oct 16, 2025
गुजरात :
गुजरात की राजनीति में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। आज (गुरुवार) राज्य के सभी 16 मंत्रियों ने अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया। दरअसल मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार शुक्रवार को होने जा रहा है। जिसके चलते यह फैसला लिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, इस बार के कैबिनेट विस्तार में लगभग 10 नए चेहरों को मौका मिल सकता है, जबकि करीब आधे मौजूदा मंत्रियों को बदलने की संभावना जताई जा रही है। यह फेरबदल संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भूपेंद्र पटेल ने 12 दिसंबर 2022 को दूसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वर्तमान में उनके मंत्रिमंडल में कुल 17 मंत्री शामिल हैं, जिनमें आठ कैबिनेट स्तर के और आठ राज्य मंत्री हैं।
नया मंत्रिमंडल शुक्रवार सुबह 11:30 बजे शपथ लेगा। गुजरात विधानसभा की कुल 182 सीटों में से 15 प्रतिशत तक मंत्री बनाए जा सकते हैं, यानी अधिकतम 27 सदस्यीय मंत्रिमंडल बन सकता है।
गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में राज्य के पूर्व मंत्री जगदीश विश्वकर्मा को केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल की जगह भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। अब माना जा रहा है कि इस बदलाव के बाद राज्य सरकार और पार्टी संगठन दोनों में नई ऊर्जा के साथ तालमेल मजबूत करने की कोशिश होगी।
कनुभाई देसाई – फाइनेंस, एनर्जी और पेट्रोकेमिकल्स
बलवंतसिंह राजपूत – इंडस्ट्रीज़, लेबर और एम्प्लॉयमेंट
ऋषिकेश पटेल – हेल्थ, फैमिली वेलफेयर और हायर एजुकेशन
राघवजी पटेल – एग्रीकल्चर, एनिमल हस्बैंड्री और फिशरीज़
कुंवरजीभाई बावलिया – वॉटर सप्लाई और सिविल सप्लाईज़
भानुबेन बाबरिया – सोशल जस्टिस और विमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट
मुलुभाई बेरा – टूरिज्म, फॉरेस्ट और एनवायरनमेंट
कुबेर डिंडोर – एजुकेशन और ट्राइबल डेवलपमेंट
नरेश पटेल
बच्चूभाई खबाद
परषोत्तम सोलंकी
हर्ष सांघवी
जगदीश विश्वकर्मा
मुकेशभाई ज़िनाभाई पटेल
कुंवाजीभाई हलपति
भिकुभाई चतुरसिंह परमार
किन्नर समुदाय का दर्दनाक कदम — वर्चस्व की जंग में 24 ने एक साथ पी लिया : किन्नर समुदाय का दर्दनाक कदम — वर्चस्व की जंग में 24 ने एक साथ पी लिया ज़हर
Thu, Oct 16, 2025
इंदौर, 16 अक्टूबर 2025 :
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में बुधवार शाम एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब किन्नर समुदाय के 24 सदस्यों ने सामूहिक रूप से ज़हर पी लिया। यह घटना शहर के नंदलालपुरा इलाके की है, जहां लंबे समय से दो गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और एम्बुलेंस की टीम मौके पर पहुंची और सभी को तत्काल एमवाय अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने राहत भरी जानकारी दी कि सभी की हालत अब खतरे से बाहर है, हालांकि दो किन्नर अभी भी आईसीयू में निगरानी में हैं।
क्या है पूरा मामला?
पंढरीनाथ थाना क्षेत्र के नंदलालपुरा में स्थित एक किन्नर डेरे में यह हादसा हुआ। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि दो गुटों के बीच वर्चस्व को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से और आक्रोश में एक गुट के 24 सदस्यों ने फिनायल जैसा जहरीला पदार्थ सेवन कर लिया।
एडिशनल डीसीपी (क्राइम ब्रांच) राजेश दंडोतिया ने बताया, “सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। प्राथमिक जांच में आत्महत्या का मामला प्रतीत नहीं होता, लेकिन पूरे प्रकरण की गहन जांच जारी है।”
घटनास्थल से सामने आए वीडियो में अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दे रहा है। साथी किन्नर एक-दूसरे को संभालते और एम्बुलेंस बुलाने की कोशिश करते नजर आए। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
समाज के हाशिये पर खड़ा यह समुदाय
इंदौर का किन्नर समुदाय शहर की सामाजिक-सांस्कृतिक बनावट का अहम हिस्सा है। जन्म और विवाह जैसे अवसरों पर आशीर्वाद देना इनकी परंपरा रही है, लेकिन आंतरिक गुटबाजी, क्षेत्रीय वर्चस्व और सामाजिक भेदभाव ने इन्हें बार-बार विवादों के केंद्र में ला दिया है।
2022 में इंदौर में एक किन्नर की हत्या का मामला सुर्खियों में था, जबकि जुलाई 2025 में विजयनगर इलाके में एक संदिग्ध मौत के पीछे भी इसी समुदाय की आपसी रंजिश बताई गई थी।
सामाजिक कार्यकर्ता नेहा शर्मा का कहना है,
“किन्नर समुदाय की समस्याएं सिर्फ सामाजिक स्वीकृति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह आर्थिक असुरक्षा और मानसिक तनाव से भी जुड़ी हैं। सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।”
प्रशासन सक्रिय, जांच जारी
पुलिस ने दोनों गुटों से पूछताछ शुरू कर दी है। पंढरीनाथ थाने के एसएचओ ने बताया कि वरिष्ठ किन्नरों को बुलाकर सुलह की कोशिश की जा रही है।
वहीं, जिला प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि सभी प्रभावितों को निःशुल्क इलाज और काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाए।
इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा, “हम इस घटना को समाज के लिए एक चेतावनी मानते हैं। किन्नर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जल्द विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा।”
आगे की राह — संवाद ही समाधान
राहत की बात है कि सभी 24 किन्नर अब खतरे से बाहर हैं, और जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है। लेकिन यह घटना एक बार फिर सोचने पर मजबूर करती है— क्या हमारे समाज में अब भी वह जगह बाकी है जहाँ हर पहचान को समान सम्मान मिले?