क्यों निकलती है रथयात्रा : महाप्रभु की रथयात्रा के पीछे की क्या है रोचक कहानी
Vinod Prasad Fri, Jun 27, 2025
15 दिन की लंबी बीमारी के बाद आज महाप्रभु जगन्नाथ स्वस्थ होकर सभी को नवयौवन रूप में दर्शन देंगे और कल अपनी मौसी के घर गुंडिचा जाएँगे। लेकिन उससे पहले महाप्रभु जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र का रथ भी सजधज कर तैयार हो गया है।

आज रात नेत्र उत्सव के बाद रथ पर महाप्रभु की ध्वजा लगेगी और कर रथयात्रा के लिए रथ भी तैयार हो जाएगा। बीएसपी की स्थापना के बाद बोरिया गांव में स्थापित श्री जगन्नाथ जी को सेक्टर 4 मंदिर में स्थापित करने के बाद लगातार 56 वर्ष से यहां पुरी धाम की तर्ज पर रथयात्रा निकाली जा रही है। मंदिर समिति के महासचिव सत्यवान नायक ने कहा कि भगवान जगन्नाथ मानव रूप में है और एक व्यक्ति की तरह वे व्यवहार करते हैं। यह रथयात्रा एक जीवन यात्रा है।

जिस तरह हम अपने जीवन में परिवार के संग समय बिताते हैं और पति-पत्नी के बीच जिस तरह नोकझोंक वाली लड़ाइयां होती है, उसी तरह महाप्रभु और माता लक्ष्मी के बीच भी नोकझोंक भी होती है और महाप्रभु उन्हें मनाते भी है। वही यह रथयात्रा भक्त और महाप्रभु के बीच की दूरी को भी खत्म करने का माध्यम है। जिस तरह श्री मंदिर में जब प्रभु विराजते हैं तो उन्हें कोई स्पर्श नहीं कर सकता, लेकिन रथयात्रा के दिन वे भक्तों की बीच आते हैं और उन्हें भी भक्तों के स्पर्श का इंतजार होता है। देखिए महाप्रभु की रथयात्रा के पीछे की क्या है रोचक कहानी और क्यों निकलती है रथयात्रा।
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