: झुलसाती गर्मी,और ट्रेनों की लेटलतीफी, यात्री हो रहे बीमार
Wed, May 17, 2023
रायपुर । गर्मी के पिक सीजन में लंबी दूरी की सभी एक्सप्रेस ट्रेनों में दो महीने तक वेटिंग के हालात है, बावजूद इसके यात्री भीषण गर्मी में ट्रेन से ही सफर को सुरक्षित मानकर यात्रा करना चाह रहे है। वेटिंग के बीच गोंदिया-बरौनी जैसी मुख्य ट्रेन के लिए यात्रियों को तीन से पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।ट्रेनों की लेटलतीफी का आलम यह है कि ऐसा कोई दिन नहीं जब औसतन हर दिन दो से तीन घंटे का समय यात्रियों का बर्बाद न होता हो। इसके अलावा शिवनाथ एक्सप्रेस, सारनाथ,दुर्ग-अंबिकापुर एक्सप्रेस, अमरकंटक, आजादहिंद, नौतनवा एक्सप्रेस एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेने घटों लेट से आ-जा रही। ट्रेने समय पर कब से चलेंगी इस बारे में रेलवे के अधिकारी जवाब देने से बच रहे हैं।रायपुर समेत पूरे प्रदेशभर में रेलवे यात्रियों की परेशानी कम होने के बजाए बढ़ती जा रही है। पिछले हफ्ते रायपुर स्टेशन का आधुनिकीकरण करने के लिए सात दिन का मेगा ब्लाक के कारण कई ट्रेने रद रही वही कुछ ट्रेनों को परिवर्तित रूट से चलाया गया। इस दौरान भरी दूपहरी में यात्री काफी परेशान रहे। पिछले पांच महीने से लगातार ट्रेने रद होने से यात्रियों को कंफर्म टिकट तक रद कराना पड़ा था, लेकिन इतने से ही यात्रियों की परेशानी खत्म नहीं हुई है। पिछले लंबे समय से एक्सप्रेस ट्रेनों का तीन से आठ-आठ घंटे तक की देरी से चल रही है। पहले दोपहर दो बजे रायपुर पहुंचने वाली ट्रेन अब शाम छह बजे पहुंच रही है। ऐसे हालात में यात्रियों को घंटों स्टेशन में ट्रेन आने का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं अचानक से ट्रेन रद होने के कारण यात्रियों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।कई दिनों से पुणे-हावड़ा आजाद हिंद एक्सप्रेस, पुरी-योगनगरी ऋषिकेश उत्कल एक्सप्रेस, हावड़ा-सीएसएमटी एक्सप्रेस, शालीमार-एलटीटी एक्सप्रेस, भोपाल-दुर्ग अमरकंटक एक्सप्रेस,अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस आदि ट्रेने घंटों लेट से आना-जाना कर रही है।
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: ई पॉस मशीन हुई बेबस, बकावंड विकासखंड में राशन वितरण ठप
Wed, May 17, 2023
ई पॉस मशीन हुई बेबस, बकावंड विकासखंड में राशन वितरण ठप
उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बन गई है यह व्यवस्था
-बड़े पैमाने पर हुए राशन घोटाले के बीच ई पॉस मशीन के ठप होने को लेकर जारी है कयासों का दौर
बकावंड। सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों में लागू की गई ई पॉस प्रणाली बकावंड विकासखंड के उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बन गई है। ई पॉस मशीन में आएदिन कनेक्टिविटी की समस्या पैदा हो जाती है। इस वजह से उपभोक्ताओं को राशन वितरण नहीं किया जाता।
ई पॉस वह तकनीक है, जिसके जरिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली की हर दुकान अथवा दुकानों के समूह सीधे तौर पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के रायपुर स्थित मुख्यालय या फिर जिला कार्यालयों से जुड़ते हैं। इसके जरिए राशन वितरण पर कड़ी निगाह रखी जाती है। रोजाना दुकान खोलते ही दुकान संचालकों का सबसे पहला काम होता है ई पॉस मशीन के जरिए राज्य या जिला मुख्यालय से लिंक होना। लिंक होने पर ही उपभोक्ताओं को राशन वितरण करना संभव हो पाता है। बकावंड विकासखंड ने ई पॉस मशीनों के लिंक फेल होने की समस्या आएदिन उत्पन्न होती रहती है। हर माह ऐसी समस्या आ जाती है। बीते चार दिनों से ई पॉस मशीनें राज्य व जिला मुख्यालय से लिंक नहीं हो पा रही हैं। नतीजतन सभी राशन दुकानों में चावल, शक्कर, चना, गुड़, नमक आदि के वितरण की व्यवस्था ठप हो गई है। उपभोक्ताओं को राशन दुकानों से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं को राशन दुकानों के दिन में दो तीन चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बकावंड विकासखंड के ग्राम बनियागांव, उलनार, टलनार, गुमडेल, कोरटा समेत सभी 90 स्थानों पर संचालित शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में खाद्यान्न वितरण ठप पड़ गया है।उपभोक्ताओं को इस माह का राशन नहीं मिल पा रहा है।
ब्लॉक में हो चुका है बड़ा राशन घोटाला
बकावंड विकासखंड में करोड़ों के राशन का घोटाला हो चुका है। क्षेत्र के वरिष्ठ खाद्य निरीक्षक श्री दीवान द्वारा शासकीय उचित मूल्य की दुकानों की जांच की गई थी। जांच में सैकड़ों क्विंटल चावल, शक्कर, चना, गुड़ और नमक की गड़बड़ी उजागर हो चुकी है। खाद्य निरीक्षक ने जांच प्रतिवेदन एसडीएम बस्तर को सौंप भी दिया है, मगर अभी तक दुकान संचालकों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो पाई है। वहीं इतने बड़े राशन घोटाले के बीच बार - बार ई पॉस मशीन का लिंक फेल होने और सर्वर डाउन हो जाने से तरह तरह की चर्चाएं चल रही हैं। लोग इसका लिंक राशन घोटाले से जोड़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऐसा करके पुनः राशन घोटाला करने की तैयारी चल रही है
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: गोबर पेंट से बनी पेंटिंग लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में हुई दर्ज
Wed, May 17, 2023
रायपुर। छत्तीसगढ़ में विश्व पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल 2023 को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में इको क्लब के विद्यार्थियों द्वारा गोबर पेंट से एक घंटे में 3600 वर्ग फीट की पेंटिंग बनाई गई।
जिसे ‘गोबर पेंट से बनी सबसे बड़ी पेंटिंग‘ के रूप में ‘लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड’ में दर्ज किया गया है।
गौरतलब है कि विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर इको क्लब के विद्यार्थियों ने ‘इनवेस्ट इन आवर प्लैनेट‘ थीम पर लाईफ अभियान के तहत एक घंटे में यह पेंटिंग बनाई थी।
यह पेंटिंग राजधानी रायपुर के एक मॉल में 100 से अधिक बच्चों ने बनाई थी। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर 2 दिवसीय जागरूकता अभियान भी चलाया गया था।
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